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सहीह बुख़ारी

नंबर 792

नंबर 792किताब 10, नंबर 187
حَدَّثَنَا بَدَلُ بْنُ الْمُحَبَّرِ، قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، قَالَ أَخْبَرَنِي الْحَكَمُ، عَنِ ابْنِ أَبِي لَيْلَى، عَنِ الْبَرَاءِ، قَالَ كَانَ رُكُوعُ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم وَسُجُودُهُ وَبَيْنَ السَّجْدَتَيْنِ وَإِذَا رَفَعَ مِنَ الرُّكُوعِ، مَا خَلاَ الْقِيَامَ وَالْقُعُودَ، قَرِيبًا مِنَ السَّوَاءِ‏.‏
Narrated Al-Bara:The bowing, the prostration the sitting in between the two prostrations and the standing after the bowing of the Prophet (ﷺ) but not qiyam (standing in the prayer) and qu`ud (sitting in the prayer) used to be approximately equal (in duration)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 10 · Call to Prayers (Adhaan)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।