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सहीह बुख़ारी

नंबर 791

नंबर 791किताब 10, नंबर 186
حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ عُمَرَ، قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ سُلَيْمَانَ، قَالَ سَمِعْتُ زَيْدَ بْنَ وَهْبٍ، قَالَ رَأَى حُذَيْفَةُ رَجُلاً لاَ يُتِمُّ الرُّكُوعَ وَالسُّجُودَ قَالَ مَا صَلَّيْتَ، وَلَوْ مُتَّ مُتَّ عَلَى غَيْرِ الْفِطْرَةِ الَّتِي فَطَرَ اللَّهُ مُحَمَّدًا صلى الله عليه وسلم‏.‏
Narrated Zaid bin Wahb:Hudhaifa saw a person who was not performing the bowing and prostration perfectly. He said to him, "You have not prayed and if you should die you would die on a religion other than that of Muhammad

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 10 · Call to Prayers (Adhaan)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।