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सहीह बुख़ारी

नंबर 692

नंबर 692किताब 10, नंबर 87
حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ الْمُنْذِرِ، قَالَ حَدَّثَنَا أَنَسُ بْنُ عِيَاضٍ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ لَمَّا قَدِمَ الْمُهَاجِرُونَ الأَوَّلُونَ الْعُصْبَةَ ـ مَوْضِعٌ بِقُبَاءٍ ـ قَبْلَ مَقْدَمِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَؤُمُّهُمْ سَالِمٌ مَوْلَى أَبِي حُذَيْفَةَ، وَكَانَ أَكْثَرَهُمْ قُرْآنًا‏.‏
Narrated Ibn `Umar:When the earliest emigrants came to Al-`Usba [??] a place in Quba', before the arrival of the Prophet- Salim, the slave of Abu Hudhaifa, who knew the Qur'an more than the others used to lead them in prayer

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 10 · Call to Prayers (Adhaan)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।