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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1359

नंबर 1359किताब 5, नंबर 110
حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ يَحْيَى الْحَرَّانِيُّ، حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ سَلَمَةَ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِسْحَاقَ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ جَعْفَرِ بْنِ الزُّبَيْرِ، عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ ‏:‏ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يُصَلِّي ثَلاَثَ عَشْرَةَ رَكْعَةً بِرَكْعَتَيْهِ قَبْلَ الصُّبْحِ ‏:‏ يُصَلِّي سِتًّا مَثْنَى مَثْنَى، وَيُوتِرُ بِخَمْسٍ لاَ يَقْعُدُ بَيْنَهُنَّ إِلاَّ فِي آخِرِهِنَّ ‏.‏
Narrated 'Aishah:The Messenger of Allah (ﷺ) used to pray thirteen rak'ahs, observing six rak'ahs in pairs including the two rak'ahs of dawn prayer. He would observe witr and five rak'ahs. He sat only in the last of them
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • HasanShuaib Al Arnaut
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Prayer (Kitab Al-Salat): Voluntary Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।