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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1358

नंबर 1358किताब 5, नंबर 109
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ مُحَمَّدٍ، عَنْ عَبْدِ الْمَجِيدِ، عَنْ يَحْيَى بْنِ عَبَّادٍ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، أَنَّ ابْنَ عَبَّاسٍ، حَدَّثَهُ فِي، هَذِهِ الْقِصَّةِ قَالَ ‏:‏ فَقَامَ فَصَلَّى رَكْعَتَيْنِ رَكْعَتَيْنِ، حَتَّى صَلَّى ثَمَانِيَ رَكَعَاتٍ، ثُمَّ أَوْتَرَ بِخَمْسٍ لَمْ يَجْلِسْ بَيْنَهُنَّ ‏.‏
Sa'id b. Jubair said that Ibn 'Abbas told him:He (the Prophet) got up and prayed eight rak'ahs in pairs, and then observed witr with five rak'ahs and he did not sit between them
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Prayer (Kitab Al-Salat): Voluntary Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।