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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1288

नंबर 1288किताब 5, नंबर 39
حَدَّثَنَا أَبُو تَوْبَةَ الرَّبِيعُ بْنُ نَافِعٍ، حَدَّثَنَا الْهَيْثَمُ بْنُ حُمَيْدٍ، عَنْ يَحْيَى بْنِ الْحَارِثِ، عَنِ الْقَاسِمِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ أَبِي أُمَامَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ صَلاَةٌ فِي أَثَرِ صَلاَةٍ لاَ لَغْوَ بَيْنَهُمَا كِتَابٌ فِي عِلِّيِّينَ ‏"‏ ‏.‏
Narrated AbuUmamah: The Prophet (ﷺ) said: Prayer followed by a prayer with no idle talk between the two is recorded in Illiyyun
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAl-Albani
  • HasanMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Prayer (Kitab Al-Salat): Voluntary Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।