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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1280

नंबर 1280किताब 5, नंबर 31
حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ سَعْدٍ، حَدَّثَنَا عَمِّي، حَدَّثَنَا أَبِي، عَنِ ابْنِ إِسْحَاقَ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرِو بْنِ عَطَاءٍ، عَنْ ذَكْوَانَ، مَوْلَى عَائِشَةَ أَنَّهَا حَدَّثَتْهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ يُصَلِّي بَعْدَ الْعَصْرِ وَيَنْهَى عَنْهَا وَيُوَاصِلُ وَيَنْهَى عَنِ الْوِصَالِ ‏.‏
Narrated Aisha, Ummul Mu'minin: Dhakwan, the client of Aisha, reported on the authority of Aisha: The Messenger of Allah (ﷺ) used to pray after the afternoon prayer but prohibited others from it; and he would fast continuously but forbid others to do so
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Prayer (Kitab Al-Salat): Voluntary Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।