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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1278

नंबर 1278किताब 5, नंबर 29
حَدَّثَنَا مُسْلِمُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، حَدَّثَنَا وُهَيْبٌ، حَدَّثَنَا قُدَامَةُ بْنُ مُوسَى، عَنْ أَيُّوبَ بْنِ حُصَيْنٍ، عَنْ أَبِي عَلْقَمَةَ، عَنْ يَسَارٍ، مَوْلَى ابْنِ عُمَرَ قَالَ رَآنِي ابْنُ عُمَرَ وَأَنَا أُصَلِّي، بَعْدَ طُلُوعِ الْفَجْرِ فَقَالَ يَا يَسَارُ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم خَرَجَ عَلَيْنَا وَنَحْنُ نُصَلِّي هَذِهِ الصَّلاَةَ فَقَالَ ‏ "‏ لِيُبَلِّغْ شَاهِدُكُمْ غَائِبَكُمْ لاَ تُصَلُّوا بَعْدَ الْفَجْرِ إِلاَّ سَجْدَتَيْنِ ‏"‏ ‏.‏
अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अनहुमा) के मुक्त किए हुए दास यसार का वर्णन है कि मैं फ़ज्र प्रकट होने के बाद नमाज़ पढ़ रहा था, तो अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़यल्लाहु अनहुमा) ने मुझे देखा और फ़रमाया: ऐ यसार! हम यही नमाज़ पढ़ रहे थे कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) हमारे पास आए और फ़रमाया: तुममें से जो लोग उपस्थित हैं, वे अनुपस्थित लोगों को यह बात पहुँचा दें कि फ़ज्र के बाद दो रकातों के सिवा कोई नमाज़ न पढ़ो।

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 5 · Prayer (Kitab Al-Salat): Voluntary Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।