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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1264

नंबर 1264किताब 5, नंबर 15
حَدَّثَنَا عَبَّاسٌ الْعَنْبَرِيُّ، وَزِيَادُ بْنُ يَحْيَى، قَالاَ حَدَّثَنَا سَهْلُ بْنُ حَمَّادٍ، عَنْ أَبِي مَكِينٍ، حَدَّثَنَا أَبُو الْفَضْلِ، - رَجُلٌ مِنَ الأَنْصَارِ - عَنْ مُسْلِمِ بْنِ أَبِي بَكْرَةَ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ خَرَجْتُ مَعَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم لِصَلاَةِ الصُّبْحِ فَكَانَ لاَ يَمُرُّ بِرَجُلٍ إِلاَّ نَادَاهُ بِالصَّلاَةِ أَوْ حَرَّكَهُ بِرِجْلِهِ ‏.‏ قَالَ زِيَادٌ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو الْفُضَيْلِ ‏.‏
Narrated AbuBakrah: I came out with the Prophet (ﷺ) to offer the dawn prayer. When he passed by a sleeping man he called him for prayer or moved him with his foot. The narrator Ziyad said: This tradition has been reported to us by AbulFadl
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Prayer (Kitab Al-Salat): Voluntary Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।