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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1263

नंबर 1263किताब 5, नंबर 14
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ زِيَادِ بْنِ سَعْدٍ، عَمَّنْ حَدَّثَهُ - ابْنِ أَبِي عَتَّابٍ، أَوْ غَيْرِهِ - عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، قَالَ قَالَتْ عَائِشَةُ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم إِذَا صَلَّى رَكْعَتَىِ الْفَجْرِ فَإِنْ كُنْتُ نَائِمَةً اضْطَجَعَ وَإِنْ كُنْتُ مُسْتَيْقِظَةً حَدَّثَنِي ‏.‏
Narrated Aisha, Ummul Mu'minin: When the Prophet (ﷺ) prayed the two rak'ahs of the dawn prayer, he would lie down if I was asleep; in case I was awake, he would talk to me
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Prayer (Kitab Al-Salat): Voluntary Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।