حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَأَحْمَدُ بْنُ مَنِيعٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ، عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، رضى الله عنها قَالَتْ كَانَ وِسَادَةُ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم - قَالَ ابْنُ مَنِيعٍ - الَّتِي يَنَامُ عَلَيْهَا بِاللَّيْلِ - ثُمَّ اتَّفَقَا - مِنْ أَدَمٍ حَشْوُهَا لِيفٌ .
Narrated 'Aishah:The pillow of the Messenger of Allah (ﷺ) on which he slept at night (according to the version on Ibn Mani') was of leather stuffed with palm fibre (according to the agreed version)
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
Sahih Muslim (2082)Zubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।