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सुनन अबू दाऊद

नंबर 3924

नंबर 3924किताब 30, नंबर 21
حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ يَحْيَى، حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ عُمَرَ، عَنْ عِكْرِمَةَ بْنِ عَمَّارٍ، عَنْ إِسْحَاقَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ قَالَ رَجُلٌ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّا كُنَّا فِي دَارٍ كَثِيرٌ فِيهَا عَدَدُنَا وَكَثِيرٌ فِيهَا أَمْوَالُنَا فَتَحَوَّلْنَا إِلَى دَارٍ أُخْرَى فَقَلَّ فِيهَا عَدَدُنَا وَقَلَّتْ فِيهَا أَمْوَالُنَا ‏.‏ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ ذَرُوهَا ذَمِيمَةً ‏"‏ ‏.‏
Narrated Anas ibn Malik: A man said: Messenger of Allah! we were in an abode in which our numbers and our goods were many and changed to an abode in which our numbers and our goods became few. The Messenger of Allah (ﷺ) said: Leave it, for it is reprehensible
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAl-Albani
  • HasanMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 30 · Divination and Omens (Kitab Al-Kahanah Wa Al-Tatayyur)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।