حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ مُحَمَّدٍ الزَّعْفَرَانِيُّ، حَدَّثَنَا عَفَّانُ، حَدَّثَنَا حَمَّادٌ، أَخْبَرَنَا ثَابِتٌ، عَنْ أَنَسٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَسْتَسْقِي هَكَذَا يَعْنِي وَمَدَّ يَدَيْهِ وَجَعَلَ بُطُونَهُمَا مِمَّا يَلِي الأَرْضَ حَتَّى رَأَيْتُ بَيَاضَ إِبْطَيْهِ .
Narrated Anas:The Prophet (ﷺ) used to make supplication for rain in this manner. he spread his hands keeping the inner side (of hands) towards the earth, so I witnessed the whiteness of his armpits
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
SahihShuaib Al Arnaut
Sahih Muslim (896)Zubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।