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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1170

नंबर 1170किताब 3, नंबर 10
حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ، أَخْبَرَنَا يَزِيدُ بْنُ زُرَيْعٍ، حَدَّثَنَا سَعِيدٌ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ أَنَسٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَانَ لاَ يَرْفَعُ يَدَيْهِ فِي شَىْءٍ مِنَ الدُّعَاءِ إِلاَّ فِي الاِسْتِسْقَاءِ فَإِنَّهُ كَانَ يَرْفَعُ يَدَيْهِ حَتَّى يُرَى بَيَاضُ إِبْطَيْهِ ‏.‏
Narrated Anas:The Prophet (peace be upon him) was not accustomed to raise his hands in any supplication he made except when praying for rain. He would then raise them high enough so much so that the whiteness of his armpits was visible
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih Bukhari (3565) Sahih Muslim (896)Zubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 3 · The Book Of The Prayer For Rain (Kitab al-Istisqa')

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।