حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الأَعْلَى، وَإِسْمَاعِيلُ، عَنْ بُرْدِ بْنِ سِنَانٍ، عَنْ عَطَاءٍ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ كُنَّا نَغْزُو مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَنُصِيبُ مِنْ آنِيَةِ الْمُشْرِكِينَ وَأَسْقِيَتِهِمْ فَنَسْتَمْتِعُ بِهَا فَلاَ يَعِيبُ ذَلِكَ عَلَيْهِمْ .
Narrated Jabir ibn Abdullah: I was on an expedition along with the Messenger of Allah (ﷺ). We got the vessels and skins of the polytheists and used them. But he did not object to them (i.e. us) for that (action)
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
Isnaad HasanZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।