حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ نُصَيْرٍ، حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عُرْوَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، - رضى الله عنها - قَالَتْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَأْكُلُ الْبِطِّيخَ بِالرُّطَبِ فَيَقُولُ " نَكْسِرُ حَرَّ هَذَا بِبَرْدِ هَذَا وَبَرْدَ هَذَا بِحَرِّ هَذَا " .
Narrated Aisha, Ummul Mu'minin: The Messenger of Allah (ﷺ) used to eat melon with fresh dates, and he used to say: The heat of the one is broken by the coolness of the other, and the coolness of the one by the heat of the other
स्रोत में दर्ज दर्जे
HasanAl-Albani
HasanMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
Isnaad SahihZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।