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सुनन अबू दाऊद

नंबर 3513

नंबर 3513किताब 24, नंबर 98
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ حَنْبَلٍ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ الشُّفْعَةُ فِي كُلِّ شِرْكٍ رَبْعَةٍ أَوْ حَائِطٍ لاَ يَصْلُحُ أَنْ يَبِيعَ حَتَّى يُؤْذِنَ شَرِيكَهُ فَإِنْ بَاعَ فَهُوَ أَحَقُّ بِهِ حَتَّى يُؤْذِنَهُ ‏"‏ ‏.‏
Narrated Jabir:The Messenger of Allah (ﷺ) as saying: There is the right of option regarding everything which is shared, whether a dwelling or a garden. It is not lawful to sell before informing one's partner, but if he sells without informing him, he has the greatest right to it
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih Muslim (1608)Zubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · Wages (Kitab Al-Ijarah)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।