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सुनन अबू दाऊद

नंबर 3304

नंबर 3304किताब 22, नंबर 63
حَدَّثَنَا شُعَيْبُ بْنُ أَيُّوبَ، حَدَّثَنَا مُعَاوِيَةُ بْنُ هِشَامٍ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عِكْرِمَةَ، عَنْ عُقْبَةَ بْنِ عَامِرٍ الْجُهَنِيِّ، أَنَّهُ قَالَ لِلنَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ‏:‏ إِنَّ أُخْتِي نَذَرَتْ أَنْ تَمْشِيَ إِلَى الْبَيْتِ ‏.‏ فَقَالَ ‏:‏ ‏ "‏ إِنَّ اللَّهَ لاَ يَصْنَعُ بِمَشْىِ أُخْتِكَ إِلَى الْبَيْتِ شَيْئًا ‏"‏ ‏.‏
Narrated Uqbah ibn Amir al-Juhani: Uqbah said to the Prophet (ﷺ): My sister has taken a vow that she will walk to the House of Allah (the Ka'bah). Thereupon he said: Allah will not do anything of the walking of your sister to the House of Allah (i.e. the Ka'bah)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 22 · Oaths and Vows (Kitab Al-Aiman Wa Al-Nudhur)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।