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सुनन अबू दाऊद

नंबर 3265

नंबर 3265किताब 22, नंबर 24
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الْعَزِيزِ بْنِ أَبِي رِزْمَةَ، أَخْبَرَنِي زَيْدُ بْنُ حُبَابٍ، أَخْبَرَنِي مُحَمَّدُ بْنُ هِلاَلٍ، حَدَّثَنِي أَبِي أَنَّهُ، سَمِعَ أَبَا هُرَيْرَةَ، يَقُولُ ‏:‏ كَانَتْ يَمِينُ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم إِذَا حَلَفَ يَقُولُ ‏:‏ ‏ "‏ لاَ، وَأَسْتَغْفِرُ اللَّهَ ‏"‏ ‏.‏
Narrated AbuHurayrah: When the Messenger of Allah (ﷺ) swore an oath, it was: No, and I beg forgiveness of Allah
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 22 · Oaths and Vows (Kitab Al-Aiman Wa Al-Nudhur)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।