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सुनन अबू दाऊद

नंबर 960

नंबर 960किताब 2, नंबर 571
حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، عَنْ يَحْيَى، بِإِسْنَادِهِ مِثْلَهُ ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ قَالَ حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ عَنْ يَحْيَى، أَيْضًا مِنَ السُّنَّةِ كَمَا قَالَ جَرِيرٌ ‏.‏
(There is another chain) from Yahya with his chain and similar (to the previous hadith). Abu Dawud said:Hammad bin Zaid also said (the wording): "From the Sunnah" (narrating) from Yahya just as Jarir did
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।