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सुनन अबू दाऊद

नंबर 955

नंबर 955किताब 2, नंबर 566
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ، قَالَ سَمِعْتُ بُدَيْلَ بْنَ مَيْسَرَةَ، وَأَيُّوبَ، يُحَدِّثَانِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ شَقِيقٍ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يُصَلِّي لَيْلاً طَوِيلاً قَائِمًا وَلَيْلاً طَوِيلاً قَاعِدًا فَإِذَا صَلَّى قَائِمًا رَكَعَ قَائِمًا وَإِذَا صَلَّى قَاعِدًا رَكَعَ قَاعِدًا ‏.‏
‘A’ishah said:The Messenger of Allah (ﷺ) used to pray standing at night for a long time, and used to pray sitting at night for a long time. When he prayed standing, he bowed standing, and when he prayed sitting, he bowed sitting
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih Muslim (730)Zubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।