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सुनन अबू दाऊद

नंबर 934

नंबर 934किताब 2, नंबर 545
حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ، أَخْبَرَنَا صَفْوَانُ بْنُ عِيسَى، عَنْ بِشْرِ بْنِ رَافِعٍ، عَنْ أَبِي عَبْدِ اللَّهِ ابْنِ عَمِّ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم إِذَا تَلاَ ‏{‏ غَيْرِ الْمَغْضُوبِ عَلَيْهِمْ وَلاَ الضَّالِّينَ ‏}‏ قَالَ ‏"‏ آمِينَ ‏"‏ ‏.‏ حَتَّى يَسْمَعَ مَنْ يَلِيهِ مِنَ الصَّفِّ الأَوَّلِ ‏.‏
Narrated AbuHurayrah: When the Messenger of Allah (ﷺ) recited the verse "Not of those with whom Thou art angry, nor of those who go astray," he would say Amin so loudly that those near him in the first row would hear it
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।