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सुनन अबू दाऊद

नंबर 749

नंबर 749किताब 2, नंबर 359
حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ عَلِيٍّ، حَدَّثَنَا مُعَاوِيَةُ، وَخَالِدُ بْنُ عَمْرٍو، وَأَبُو حُذَيْفَةَ قَالُوا حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، بِإِسْنَادِهِ بِهَذَا قَالَ فَرَفَعَ يَدَيْهِ فِي أَوَّلِ مَرَّةٍ وَقَالَ بَعْضُهُمْ مَرَّةً وَاحِدَةً ‏.‏
This tradition has also been transmitted by Sufyan through a different chain of narrators. This version has:He raised his hands once in the beginning. Some narrated: (raised his hands) once only
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।