حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، حَدَّثَنَا أَبُو أَحْمَدَ الزُّبَيْرِيُّ، حَدَّثَنَا مِسْعَرٌ، عَنْ ثَابِتِ بْنِ عُبَيْدٍ، عَنْ عُبَيْدِ بْنِ الْبَرَاءِ، عَنِ الْبَرَاءِ بْنِ عَازِبٍ، قَالَ كُنَّا إِذَا صَلَّيْنَا خَلْفَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَحْبَبْنَا أَنْ نَكُونَ عَنْ ي��مِينِهِ فَيُقْبِلُ عَلَيْنَا بِوَجْهِهِ صلى الله عليه وسلم .
Narrated Al-Bara' ibn Azib: When we would pray behind the Messenger of Allah (ﷺ), we liked to be on his right side. He (the Prophet) would sit turning his face towards us (and back towards the Ka'bah) (ﷺ)
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
Sahih Muslim (709)Zubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।