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सुनन अबू दाऊद

नंबर 535

नंबर 535किताब 2, नंबर 145
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سَلَمَةَ، حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ، عَنْ يَحْيَى بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ سَالِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، وَسَعِيدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، أَنَّ ابْنَ أُمِّ مَكْتُومٍ، كَانَ مُؤَذِّنًا لِرَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم وَهُوَ أَعْمَى ‏.‏
‘A’ishah reported:Ibn Umm Maktum was the mu'adhdhin of the Messenger of Allah (May peace be upon him) and he was blind
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • Sahih Muslim (381)Zubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।