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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1150

नंबर 1150किताब 2, नंबर 761
حَدَّثَنَا ابْنُ السَّرْحِ، أَخْبَرَنَا ابْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنِي ابْنُ لَهِيعَةَ، عَنْ خَالِدِ بْنِ يَزِيدَ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، بِإِسْنَادِهِ وَمَعْنَاهُ قَالَ سِوَى تَكْبِيرَتَىِ الرُّكُوعِ ‏.‏
The above mentioned tradition has also been narrated by Ibn Shihab through a different chain of transmitters to the same effect. This version adds:"Except the two takers pronounced at the time of the bowing
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • Hasan LighairihiShuaib Al Arnaut
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।