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सुनन अबू दाऊद

नंबर 2739

नंबर 2739किताब 15, नंबर 263
حَدَّثَنَا هَارُونُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ بَكَّارِ بْنِ بِلاَلٍ، حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ خَالِدِ بْنِ مَوْهَبٍ الْهَمْدَانِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ زَكَرِيَّا بْنِ أَبِي زَائِدَةَ، قَالَ أَخْبَرَنِي دَاوُدُ، بِهَذَا الْحَدِيثِ بِإِسْنَادِهِ قَالَ فَقَسَّمَهَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بِالسَّوَاءِ ‏.‏ وَحَدِيثُ خَالِدٍ أَتَمُّ ‏.‏
The tradition mentioned above has been transmitted by Dawud with a different chain of narrators. He said “The Apostle of Allaah(ﷺ) apportioned it (spoils of war) equally. The tradition of Khalid is more perfect
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · Jihad (Kitab Al-Jihad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।