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सुनन अबू दाऊद

नंबर 2664

नंबर 2664किताब 15, नंबर 188
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عِيسَى، حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ نَجِيحٍ، - وَلَيْسَ بِالْمَلْطِيِّ - عَنْ مَالِكِ بْنِ حَمْزَةَ بْنِ أَبِي أُسَيْدٍ السَّاعِدِيِّ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ جَدِّهِ، قَالَ قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم يَوْمَ بَدْرٍ ‏ "‏ إِذَا أَكْثَبُوكُمْ فَارْمُوهُمْ بِالنَّبْلِ وَلاَ تَسُلُّوا السُّيُوفَ حَتَّى يَغْشَوْكُمْ ‏"‏ ‏.‏
Narrated AbuUsayd as-Sa'idi: The Prophet (ﷺ) said at the battle of Badr: When they come near you shoot arrows at them; and do not draw swords at them until they come near you
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · Jihad (Kitab Al-Jihad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।