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सुनन अबू दाऊद

नंबर 2663

नंबर 2663किताब 15, नंबर 187
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ سِنَانٍ، حَدَّثَنَا أَبُو أَحْمَدَ الزُّبَيْرِيُّ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ سُلَيْمَانَ بْنِ الْغَسِيلِ، عَنْ حَمْزَةَ بْنِ أَبِي أُسَيْدٍ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم حِينَ اصْطَفَفْنَا يَوْمَ بَدْرٍ ‏ "‏ إِذَا أَكْثَبُوكُمْ - يَعْنِي إِذَا غَشُوكُمْ - فَارْمُوهُمْ بِالنَّبْلِ وَاسْتَبْقُوا نَبْلَكُمْ ‏"‏ ‏.‏
Abu Usaid reported the Apostle of Allaah(ﷺ) as saying to us at the battle of Badr when he drew up in rows. When they came near you, shoot arrows at them, but do not use all your arrows
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih Bukhari (3984، 3985)Zubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · Jihad (Kitab Al-Jihad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।