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सुनन अबू दाऊद

नंबर 2601

नंबर 2601किताब 15, नंबर 125
حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ عَلِيٍّ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ إِسْحَاقَ السَّيْلَحِينِيُّ، حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ، عَنْ أَبِي جَعْفَرٍ الْخَطْمِيِّ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ كَعْبٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ الْخَطْمِيِّ، قَالَ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم إِذَا أَرَادَ أَنْ يَسْتَوْدِعَ الْجَيْشَ قَالَ ‏ "‏ أَسْتَوْدِعُ اللَّهَ دِينَكُمْ وَأَمَانَتَكُمْ وَخَوَاتِيمَ أَعْمَالِكُمْ ‏"‏ ‏.‏
Narrated Abdullah al-Khutami: When the Prophet (ﷺ) wanted to say farewell to an army, he would say: I entrust to Allah your religion, what you are responsible for, and your final deeds
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · Jihad (Kitab Al-Jihad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।