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सुनन अबू दाऊद

नंबर 2600

नंबर 2600किताब 15, नंबर 124
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ دَاوُدَ، عَنْ عَبْدِ الْعَزِيزِ بْنِ عُمَرَ، عَنْ إِسْمَاعِيلَ بْنِ جَرِيرٍ، عَنْ قَزَعَةَ، قَالَ قَالَ لِي ابْنُ عُمَرَ هَلُمَّ أُوَدِّعْكَ كَمَا وَدَّعَنِي رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ أَسْتَوْدِعُ اللَّهَ دِينَكَ وَأَمَانَتَكَ وَخَوَاتِيمَ عَمَلِكَ ‏"‏ ‏.‏
Qaza’ah said Ibn ‘Umar told me “Come, I see off you as the Apostle of Allaah(ﷺ) saw me off. I entrust to Allaah your religion what you are responsible for and your final deeds.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · Jihad (Kitab Al-Jihad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।