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सुनन अबू दाऊद

नंबर 2597

नंबर 2597किताब 15, नंबर 121
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ كَثِيرٍ، أَخْبَرَنَا سُفْيَانُ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنِ الْمُهَلَّبِ بْنِ أَبِي صُفْرَةَ، قَالَ أَخْبَرَنِي مَنْ، سَمِعَ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ إِنْ بُيِّتُّمْ فَلْيَكُنْ شِعَارُكُمْ حم لاَ يُنْصَرُونَ ‏"‏ ‏.‏
Narrated A man who heard the Prophet: Al-Muhallab ibn AbuSufrah said: A man who heard the Prophet (ﷺ) say: If the enemy attacks you at night, let your war cry be Ha-Mim. They will not be helped
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · Jihad (Kitab Al-Jihad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।