सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन अबू दाऊद

नंबर 2596

नंबर 2596किताब 15, नंबर 120
حَدَّثَنَا هَنَّادٌ، عَنِ ابْنِ الْمُبَارَكِ، عَنْ عِكْرِمَةَ بْنِ عَمَّارٍ، عَنْ إِيَاسِ بْنِ سَلَمَةَ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ غَزَوْنَا مَعَ أَبِي بَكْرٍ - رضى الله عنه - زَمَنَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَكَانَ شِعَارُنَا أَمِتْ أَمِتْ ‏.‏
Ilyas bin Salamah(bin Al Akwa’) said on the authority of his father “We went on an expedition with Abu Bakr (Allaah be pleased with him) in the time of the Apostle of Allaah(ﷺ) and our war cry was “Put to death” “Put to death”.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Hasan SahihAl-Albani
  • Hasan SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · Jihad (Kitab Al-Jihad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।