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सुनन अबू दाऊद

नंबर 2585

नंबर 2585किताब 15, नंबर 109
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنِي يَحْيَى بْنُ كَثِيرٍ أَبُو غَسَّانَ الْعَنْبَرِيُّ، عَنْ عُثْمَانَ بْنِ سَعْدٍ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ كَانَتْ ‏.‏ فَذَكَرَ مِثْلَهُ ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ أَقْوَى هَذِهِ الأَحَادِيثِ حَدِيثُ سَعِيدِ بْنِ أَبِي الْحَسَنِ وَالْبَاقِيَةُ ضِعَافٌ ‏.‏
The tradition mentioned above has also been narrated by Anas bin Malik through a different chain of narrators. He mentioned similar words. Abu Dawud said “the strongest of these traditions is the one of Sa’id bin Abu Al Hasan. The rest are weak
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • Sahih LighairihiMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · Jihad (Kitab Al-Jihad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।