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सुनन अबू दाऊद

नंबर 2580

नंबर 2580किताब 15, नंबर 104
حَدَّثَنَا مَحْمُودُ بْنُ خَالِدٍ، حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ بَشِيرٍ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، بِإِسْنَادِ عَبَّادٍ وَمَعْنَاهُ ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ رَوَاهُ مَعْمَرٌ وَشُعَيْبٌ وَعَقِيلٌ عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ رِجَالٍ، مِنْ أَهْلِ الْعِلْمِ وَهَذَا أَصَحُّ عِنْدَنَا ‏.‏
The tradition mentioned above has also been transmitted by Al Zuhri with the chain of ‘Abbad and to the same affect. Abu Dawud said “This tradition has also been narrated by Ma’mar, Shu’aib and ‘Aqil on the authority of Al Zuhri from a number of scholars and this is the soundest one in our opinion
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · Jihad (Kitab Al-Jihad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।