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सुनन अबू दाऊद

नंबर 2146

नंबर 2146किताब 12, नंबर 101
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ أَبِي خَلَفٍ، وَأَحْمَدُ بْنُ عَمْرِو بْنِ السَّرْحِ، قَالاَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، - قَالَ ابْنُ السَّرْحِ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ - عَنْ إِيَاسِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي ذُبَابٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ لاَ تَضْرِبُوا إِمَاءَ اللَّهِ ‏"‏ ‏.‏ فَجَاءَ عُمَرُ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ ذَئِرْنَ النِّسَاءُ عَلَى أَزْوَاجِهِنَّ ‏.‏ فَرَخَّصَ فِي ضَرْبِهِنَّ فَأَطَافَ بِآلِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم نِسَاءٌ كَثِيرٌ يَشْكُونَ أَزْوَاجَهُنَّ فَقَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ لَقَدْ طَافَ بِآلِ مُحَمَّدٍ نِسَاءٌ كَثِيرٌ يَشْكُونَ أَزْوَاجَهُنَّ لَيْسَ أُولَئِكَ بِخِيَارِكُمْ ‏"‏ ‏.‏
इयास बिन अब्दुल्लाह बिन अबू जुबाब (रज़ियल्लाहु अन्हु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : "अल्लाह की दासियों को मत मारो।" यह सुन उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आए और कहने लगे : स्त्रियाँ अपने पतियों को जुर्रत दिखाने लगी हैं। अतः, आपने उन्हें मारने की अनुमति दी। इसके बाद बहुत-सी स्त्रियाँ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की पत्नियों के पास आकर अपने पतियों की शिकायत करने लगीं, तो अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : "मुहम्मद की पत्नियों के पास बहुत-सी महिलाएँ आकर अपने पतियों की शिकायत कर गई हैं। दरअसल वे तुम्हारे अच्छे लोग नहीं हैं।"

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 12 · Marriage (Kitab Al-Nikah)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।