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सुनन अबू दाऊद

नंबर 2078

नंबर 2078किताब 12, नंबर 33
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ حَنْبَلٍ، وَعُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، - وَهَذَا لَفْظُ إِسْنَادِهِ - وَكِلاَهُمَا عَنْ وَكِيعٍ، حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ صَالِحٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ عَقِيلٍ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ أَيُّمَا عَبْدٍ تَزَوَّجَ بِغَيْرِ إِذْنِ مَوَالِيهِ فَهُوَ عَاهِرٌ ‏"‏ ‏.‏
Narrated Jabir ibn Abdullah: The Prophet (ﷺ) said: If any slave marries without the permission of his masters, he is a fornicator
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAl-Albani
  • HasanMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • Hasan SahihShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · Marriage (Kitab Al-Nikah)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।