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सुनन अबू दाऊद

नंबर 2008

नंबर 2008किताब 11, नंबर 288
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ حَنْبَلٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، عَنْ هِشَامٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ إِنَّمَا نَزَلَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم الْمُحَصَّبَ لِيَكُونَ أَسْمَحَ لِخُرُوجِهِ وَلَيْسَ بِسُنَّةٍ فَمَنْ شَاءَ نَزَلَهُ وَمَنْ شَاءَ لَمْ يَنْزِلْهُ ‏.‏
Narrated 'Aishah:The Messenger of Allah (ﷺ) alighted at al-Muhassab so that it might be easier for him to proceed (to Medina). It is not a sunnah (i.e. a rite of Hajj). Anyone who desires may alight there, and anyone who does not want may not alight
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 11 · The Rites of Hajj (Kitab Al-Manasik Wa'l-Hajj)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।