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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1842

नंबर 1842किताब 11, नंबर 122
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، أَنَّ مُحَمَّدَ بْنَ جَعْفَرٍ، حَدَّثَهُمْ حَدَّثَنَا سَعِيدٌ، عَنْ مَطَرٍ، وَيَعْلَى بْنِ حَكِيمٍ، عَنْ نَافِعٍ، عَنْ نُبَيْهِ بْنِ وَهْبٍ، عَنْ أَبَانَ بْنِ عُثْمَانَ، عَنْ عُثْمَانَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ذَكَرَ مِثْلَهُ زَادَ ‏ "‏ وَلاَ يَخْطُبُ ‏"‏ ‏.‏
The aforesaid tradition has also been transmitted by Aban bin ‘Uthman on the authority of ‘Uthman from the Apostle of Allaah(ﷺ) in a similar manner. This version adds “And he should not make a betrothal”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 11 · The Rites of Hajj (Kitab Al-Manasik Wa'l-Hajj)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।