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Tafsīr al-Baghawī · Aal-i-Imraan
सूरह 3

Aal-i-Imraan

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यह एक शास्त्रीय तफ़सीर का अरबी पाठ है, जैसा Quranic Universal Library (QUL, Tarteel की) में है, QUL के डेटा की उस खुली प्रति से लिया गया जो spa5k/tafsir_api रखता है। QUL यह नहीं बताती कि वह किस छपे संस्करण का अनुसरण करती है और पाठों के लिए कोई लाइसेंस नहीं बताती, इसलिए उन्हें दिखाने का अधिकार सत्यापित नहीं है। किसी ने इसे छपी किताब या पांडुलिपि से नहीं मिलाया है और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हर अंश उन आयतों के पास है जिन पर वह टिप्पणी करता है; वे आयतें Tanzil का क़ुरआनी पाठ हैं, जैसा वहाँ है। जहाँ पाठ में संपादक की कोई टिप्पणी दोहरे कोष्ठक में है, वहाँ वह जैसी है वैसी दिखाई गई है। अभी कोई अनुवाद नहीं है।

पाठ का स्रोत:Quranic Universal Libraryspa5k/tafsir_apiMIT2026-10-21 को लिया गया

आयत 99

قُلْ يَـٰٓأَهْلَ ٱلْكِتَـٰبِ لِمَ تَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ مَنْ ءَامَنَ تَبْغُونَهَا عِوَجًا وَأَنتُمْ شُهَدَآءُ ۗ وَمَا ٱللَّهُ بِغَـٰفِلٍ عَمَّا تَعْمَلُونَ 99

قَوْلُهُ تَعَالَى: ﴿قُلْ يَا أهل الكتاب لما تَكْفُرُونَ بِآيَاتِ اللَّهِ وَاللَّهُ شَهِيدٌ عَلَى مَا تَعْمَلُونَ﴾

﴿قُلْ يَا أَهْلَ الْكِتَابِ لِمَ تَصُدُّونَ عَنْ سَبِيلِ اللَّهِ﴾ أَيْ: لِمَ تَصْرِفُونَ عَنْ دِينِ اللَّهِ، ﴿مَنْ آمَنَ تَبْغُونَهَا﴾

تَطْلُبُونَهَا، ﴿عِوَجًا﴾ زَيْغًا وَمَيْلًا يَعْنِي: لِمَ تَصُدُّونَ عَنْ سَبِيلِ اللَّهِ بَاغِينَ لَهَا عِوَجًا؟ قَالَ أَبُو عُبَيْدَةَ: الْعِوَجُ -بِالْكَسْرِ -فِي الدِّينِ وَالْقَوْلِ وَالْعَمَلِ وَالْعَوَجُ -بِالْفَتْحِ -فِي الْجِدَارِ، وَكُلِّ شَخْصٍ قَائِمٍ، ﴿وَأَنْتُمْ شُهَدَاءُ وَمَا اللَّهُ بِغَافِلٍ عَمَّا تَعْمَلُونَ﴾ [أَنَّ فِي التَّوْرَاةِ مَكْتُوبًا] [[في أ: "أن التوراة فيها مكتوب".]] نَعْتُ مُحَمَّدٍ ﷺ وَإِنَّ دِينَ اللَّهِ الَّذِي لَا يَقْبَلُ غَيْرَهُ هُوَ الْإِسْلَامُ.