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सूरह 6 · आयत 125

Al-An'aam 6:125

الأنعام

فَمَن يُرِدِ ٱللَّهُ أَن يَهْدِيَهُۥ يَشْرَحْ صَدْرَهُۥ لِلْإِسْلَـٰمِ ۖ وَمَن يُرِدْ أَن يُضِلَّهُۥ يَجْعَلْ صَدْرَهُۥ ضَيِّقًا حَرَجًا كَأَنَّمَا يَصَّعَّدُ فِى ٱلسَّمَآءِ ۚ كَذَٰلِكَ يَجْعَلُ ٱللَّهُ ٱلرِّجْسَ عَلَى ٱلَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ

मतलब

तो वह व्यक्ति जिसे अल्लाह चाहता है कि उसे मार्गदर्शन प्रदान करे, उसका सीना इस्लाम के लिए खोल देता है और जिसे चाहता है कि उसे गुमराह करे, उसका सीना तंग, अत्यंत घुटा हुआ कर देता है, मानो वह बड़ी कठिनाई से आकाश में चढ़ रहा[80] है। इसी प्रकार अल्लाह उन लोगों पर यातना भेज देता है, जो ईमान नहीं लाते।

[80] अर्थात उसे इस्लाम का मार्ग एक कठिन चढ़ाई लगता है, जिसके विचार ही से उसका सीना तंग हो जाता है और श्वासावरोध होने लगता है।

मतलब: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari. Translated by Azizul Haq Al-Omari वर्शन 1.1.5, 2025-08-05। QuranEnc.com

तफ़सीर

जिस व्यक्ति को अल्लाह हिदायत के मार्ग पर ले जाना चाहता है, उसके सीने को खोल देता है तथा उसे इस्लाम स्वीकार करने के लिए तैयार कर देता है। और जिसे वह विफल करना चाहता है और उसे हिदायत की तौफ़ीक़ नहीं देना चाहता, उसके सीने को सच्चाई को स्वीकार करने से बहुत संकीर्ण कर देता है, ताकि उसके हृदय में सत्य का प्रवेश असंभव हो जाए। जिस तरह कि उसका आसमान की ओर चढ़ना असंभव है और वह स्वयं ऐसा करने में असमर्थ है। तथा जैसे अल्लाह ने पथभ्रष्ट व्यक्ति की स्थिति को इस तरह की गंभीर संकट की स्थिति बना दी है, उसी तरह वह उन लोगों को यातना से ग्रस्त करता है, जो उसपर ईमान नहीं लाते।

यह संस्करण हर आयत की तशरीह करता है; यह उसका तर्जुमा नहीं है। मतलब: Hindi Translation of Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Quran. Issued by Tafsir Center for Quranic Studies वर्शन 1.0.0, 2024-02-20। QuranEnc.com

Al-An'aam

अरबी Tanzil का टेक्स्ट है, बिना किसी बदलाव के। मतलब अपने पब्लिशरों के एडिशन हैं, बिना किसी बदलाव के; सबील के अपने जाँच करने वालों ने अभी तक इन्हें नहीं जाँचा है। अरबी: Tanzil उस्मानी टेक्स्ट, वर्शन 1.1। स्रोत: tanzil.net