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सूरह 58 · आयत 12

Al-Mujaadila 58:12

المجادلة

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ إِذَا نَـٰجَيْتُمُ ٱلرَّسُولَ فَقَدِّمُوا۟ بَيْنَ يَدَىْ نَجْوَىٰكُمْ صَدَقَةً ۚ ذَٰلِكَ خَيْرٌ لَّكُمْ وَأَطْهَرُ ۚ فَإِن لَّمْ تَجِدُوا۟ فَإِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ

मतलब

ऐ ईमान वालो! जब तुम रसूल से गुप्त रूप से बात करो, तो गुप्त रूप से बात करने से पहले कुछ दान करो।[9] यह तुम्हारे लिए उत्तम तथा अधिक पवित्र है। फिर यदि तुम (दान के लिए कुछ) न पाओ, तो अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।

[9] प्रत्येक मुसलमान नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से एकांत में बात करना चाहता था। जिससे आपको परेशानी होती थी। इस लिए यह आदेश दिया गया।

मतलब: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari. Translated by Azizul Haq Al-Omari वर्शन 1.1.5, 2025-08-05। QuranEnc.com

तफ़सीर

जब सहाबा नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से बहुत ज़्यादा कानाफूसी करने लगे, तो अल्लाह ने फरमाया : ऐ ईमान वालो! जब तुम रसूल से गुप्त रूप से बात करना चाहो, तो गुप्त रूप से बात करने से पहले सदक़ा पेश करो। यह सदक़ा पेश करना तुम्हारे लिए उत्तम और अधिक पवित्र है। क्योंकि उसमें अल्लाह का आज्ञापालन है, जो दिलों को शुद्ध (पवित्र) करता है। अगर तुम्हें सदक़ा करने के लिए कुछ न मिले, तो उनसे गुप्त रूप से बात करने में तुमपर कोई गुनाह नहीं है। क्योंकि अल्लाह अपने बंदों के गुनाहों को माफ़ करने वाला और उनपर दया करने वाला है। यही कारण है कि उसने उन्हें केवल उसी चीज़ का बाध्य किया है,जो वे कर सकते हैं।

यह संस्करण हर आयत की तशरीह करता है; यह उसका तर्जुमा नहीं है। मतलब: Hindi Translation of Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Quran. Issued by Tafsir Center for Quranic Studies वर्शन 1.0.0, 2024-02-20। QuranEnc.com

Al-Mujaadila

अरबी Tanzil का टेक्स्ट है, बिना किसी बदलाव के। मतलब अपने पब्लिशरों के एडिशन हैं, बिना किसी बदलाव के; सबील के अपने जाँच करने वालों ने अभी तक इन्हें नहीं जाँचा है। अरबी: Tanzil उस्मानी टेक्स्ट, वर्शन 1.1। स्रोत: tanzil.net