Al-Maaida 5:6
المائدةيَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ إِذَا قُمْتُمْ إِلَى ٱلصَّلَوٰةِ فَٱغْسِلُوا۟ وُجُوهَكُمْ وَأَيْدِيَكُمْ إِلَى ٱلْمَرَافِقِ وَٱمْسَحُوا۟ بِرُءُوسِكُمْ وَأَرْجُلَكُمْ إِلَى ٱلْكَعْبَيْنِ ۚ وَإِن كُنتُمْ جُنُبًا فَٱطَّهَّرُوا۟ ۚ وَإِن كُنتُم مَّرْضَىٰٓ أَوْ عَلَىٰ سَفَرٍ أَوْ جَآءَ أَحَدٌ مِّنكُم مِّنَ ٱلْغَآئِطِ أَوْ لَـٰمَسْتُمُ ٱلنِّسَآءَ فَلَمْ تَجِدُوا۟ مَآءً فَتَيَمَّمُوا۟ صَعِيدًا طَيِّبًا فَٱمْسَحُوا۟ بِوُجُوهِكُمْ وَأَيْدِيكُم مِّنْهُ ۚ مَا يُرِيدُ ٱللَّهُ لِيَجْعَلَ عَلَيْكُم مِّنْ حَرَجٍ وَلَـٰكِن يُرِيدُ لِيُطَهِّرَكُمْ وَلِيُتِمَّ نِعْمَتَهُۥ عَلَيْكُمْ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
ऐ ईमान वालो! जब तुम नमाज़ के लिए उठो, तो अपने चेहरों को और अपने हाथों को कुहनियों समेत धो लो और अपने सिरों का मसह़[10] करो तथा अपने पाँवों को टखनों समेत (धो लो)। और यदि तुम जनाबत[11] की हालत में हो, तो स्नान कर लो। तथा यदि तुम बीमार हो, अथवा यात्रा में हो, अथवा तुममें से कोई शौचकर्म से आया हो, अथवा तुमने स्त्रियों से सहवास किया हो, फिर कोई पानी न पाओ, तो पाक मिट्टी का क़सद करो और उससे अपने चेहरों तथा हाथों पर मसह [12]कर लो। अल्लाह नहीं चाहता कि तुमपर कोई तंगी करे। लेकिन वह चाहता है कि तुम्हें पाक करे और ताकि अपनी नेमत तुमपर पूरी करे, ताकि तुम शुक्र करो।
[10] मसह़ का अर्थ है, दोनों हाथ भिगोकर सिर पर फेरना।
[11] जनाबत से अभिप्राय वह मलिनता है, जो स्वप्नदोष तथा स्त्री संभोग से होती है। यही आदेश मासिक धर्म तथा प्रसव का भी है।
[12] ह़दीस में है कि एक यात्रा में आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा का हार खो गया, जिसके लिए बैदा के स्थान पर रुकना पड़ा। भोर की नमाज़ के वुज़ु के लिए पानी नहीं मिल सका और यह आयत उतरी। (देखिए : सह़ीह़ बुख़ारी : 4607) मसह़ का अर्थ हाथ फेरना है। तयम्मुम के लि देखिए : सूरतुन-निसा, आयत : 43)
मतलब: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari. Translated by Azizul Haq Al-Omari वर्शन 1.1.5, 2025-08-05। QuranEnc.com
ऐ ईमान वालो! जब तुम नमाज़ अदा करने के लिए उठना चाहो, और तुम 'हदस-ए-असग़र' (छोटी नापाकी, बे-वुज़ू होने) की हालत में हो, तो वुज़ू कर लो, इस प्रकार कि अपने मुँह धो लो तथा अपने हाथों को कुहनियों समेत धो लो और अपने सिरों का मसह़ करो, तथा अपने पाँवों को टखनों समेत धो लो, जो पिंडली के जोड़ पर उभरे हुए होते हैं। यदि तुम 'हदस-ए-अकबर' (बड़ी नापाकी, जिसके लिए ग़ुस्ल की आवश्यता होती है) की हालत में हो, तो स्नान कर लो। तथा यदि तुम बीमार हो, तुम्हें बीमारी के बढ़ने या ठीक होने में देरी होने का डर है, या तुम स्वस्थ होने की स्थिति में यात्रा कर रहे हो, या तुम उदाहरण के तौर पर शौचकर्म के कारण 'हदस-ए-असग़र' (छोटी अशुद्धता) की हालत में हो, या महिलाओं के साथ संभोग करके 'हदस-ए-अकबर' (बड़ी अशुद्धता) की हालत में हो, और खोजने के बाद भी तुम्हें पानी न मिले - जिससे अपने आपको शुद्ध (पाक) कर सको -, तो ज़मीन की सतह (मिट्टी) का क़सद करो और उसपर अपने हाथों को मारो और (उन्हें) अपने चेहरों पर फेरो तथा अपने हाथों पर फेरो (यानी मसह़ करो)। अल्लाह तुम्हें पानी का उपयोग करने के लिए बाध्य करके, जो तुम्हें नुक़सान पहुँचाता है, अपने प्रावधानों में तुमपर तंगी नहीं करना चाहता है। इसलिए किसी बीमारी या पानी न मिलने के कारण उसका उपयोग दुर्लभ होने के समय उसने तुम्हारे लिए उसका एक विकल्प निर्धारित किया है, ताकि वह तुमपर अपना अनुग्रह पूरा कर दे, तथा तुम अपने ऊपर अल्लाह की नेमत का शुक्र अदा करो और उसकी नाशुक्री न करो।
यह संस्करण हर आयत की तशरीह करता है; यह उसका तर्जुमा नहीं है। मतलब: Hindi Translation of Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Quran. Issued by Tafsir Center for Quranic Studies वर्शन 1.0.0, 2024-02-20। QuranEnc.com
अरबी Tanzil का टेक्स्ट है, बिना किसी बदलाव के। मतलब अपने पब्लिशरों के एडिशन हैं, बिना किसी बदलाव के; सबील के अपने जाँच करने वालों ने अभी तक इन्हें नहीं जाँचा है। अरबी: Tanzil उस्मानी टेक्स्ट, वर्शन 1.1। स्रोत: tanzil.net