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सूरह 5 · आयत 2

Al-Maaida 5:2

المائدة

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ لَا تُحِلُّوا۟ شَعَـٰٓئِرَ ٱللَّهِ وَلَا ٱلشَّهْرَ ٱلْحَرَامَ وَلَا ٱلْهَدْىَ وَلَا ٱلْقَلَـٰٓئِدَ وَلَآ ءَآمِّينَ ٱلْبَيْتَ ٱلْحَرَامَ يَبْتَغُونَ فَضْلًا مِّن رَّبِّهِمْ وَرِضْوَٰنًا ۚ وَإِذَا حَلَلْتُمْ فَٱصْطَادُوا۟ ۚ وَلَا يَجْرِمَنَّكُمْ شَنَـَٔانُ قَوْمٍ أَن صَدُّوكُمْ عَنِ ٱلْمَسْجِدِ ٱلْحَرَامِ أَن تَعْتَدُوا۟ ۘ وَتَعَاوَنُوا۟ عَلَى ٱلْبِرِّ وَٱلتَّقْوَىٰ ۖ وَلَا تَعَاوَنُوا۟ عَلَى ٱلْإِثْمِ وَٱلْعُدْوَٰنِ ۚ وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ ۖ إِنَّ ٱللَّهَ شَدِيدُ ٱلْعِقَابِ

मतलब

ऐ ईमान वालो! अल्लाह की निशानियों[3] का अनादर न करो, न सम्मानित महीने[4] का, न ह़रम की क़ुर्बानी का, न पट्टे वाले जानवरों का, और न उन लोगों का जो अपने पालनहार के अनुग्रह और उसकी प्रसन्नता की खोज में सम्मानित घर (काबा) की ओर जा रहे हों। और जब एह़राम खोल दो, तो शिकार करो। और किसी गिरोह की दुश्मनी, इस कारण कि उन्होंने तुम्हें मस्जिदे-ह़राम से रोका था, तुम्हें इस बात पर न उभारे कि अत्याचार करने लगो। तथा नेकी और परहेज़गारी पर एक-दूसरे का सहयोग करो और पाप तथा अत्याचार पर एक-दूसरे की सहायता न करो। और अल्लाह से डरो। निःसंदेह अल्लाह कड़ी यातना देने वाला है।

[3] अल्लाह की उपासना के लिए निर्धारित चिह्नों का।
[4] अर्थात ज़ुल-क़ादा, ज़ुल-ह़िज्जा, मुह़र्रम तथा रजब के मासों में युद्ध न करो।

मतलब: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari. Translated by Azizul Haq Al-Omari वर्शन 1.1.5, 2025-08-05। QuranEnc.com

तफ़सीर

ऐ ईमान वालो! अल्लाह की उन हुर्मत वाली (सम्मानित) चीज़ों का अनादर न करो, जिनके सम्मान का उसने तुम्हें आदेश दिया है, तथा एहराम की अवस्था में निषिद्ध चीज़ों : जैसे सिले हुए कपड़े पहनने, तथा 'हरम' (की सीमा) के अंदर निषिद्ध चीज़ों, जैसे कि शिकार करने से दूर रहो। तथा सम्मानित महीनों अर्थात् ज़ुल-क़ादा, ज़ुल-ह़िज्जा, मुहर्रम और रजब में युद्ध को वैध न ठहराओ। जिन जानवरों को अल्लाह के नाम पर ज़बह करने के लिए हरम भेजा जाता है, उन्हें हथियाकर या उन्हें काबा जाने से रोककर उनका अनादर न करो। उन जानवरों का भी अपमान न करो, जिनके गले पर ऊन आदि के पट्टे डाले गए हों, ताकि पता चल जाए कि वे (हज्ज की) क़ुर्बानी के जानवर हैं। तथा उन लोगों का भी अनादर न करो, जो व्यापार के लाभ और अल्लाह की प्रसन्नता की तलाश में अल्लाह के सम्मानित घर की ओर जाते हैं। और जब तुम ह़ज्ज या उम्रा के एहराम से हलाल हो जाओ और हरम की सीमा से बाहर निकल जाओ, तो यदि चाहो तो शिकार करो। तथा जिन लोगों ने तुम्हें मस्जिदे-ह़राम से रोका है, उनसे दुश्मनी तुम्हें अत्याचार करने और उनके साथ न्याय करना छोड़ देने पर न उभारे। तथा (ऐ मोमिनो!) अल्लाह के आदेशों का पालन करने और उसके निषेधों से बचने में एक-दूसरे का सहयोग करो। और उन पापों में जिनका करने वाला गुनहगार होता है, तथा लोगों पर उनके खून, धन और सतीत्व के संबंध में ज़्यादती (आक्रमण) करने में सहयोग न करो। तथा अल्लाह की आज्ञाकारिता पर अडिग रहकर और उसकी अवज्ञा से दूर रहकर, उससे डरो। निःसंदेह अल्लाह उसे कठोर दंड देने वाला है जो उसकी अवज्ञा करने वाला है। इसलिए उसकी सज़ा से सावधान रहो।

यह संस्करण हर आयत की तशरीह करता है; यह उसका तर्जुमा नहीं है। मतलब: Hindi Translation of Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Quran. Issued by Tafsir Center for Quranic Studies वर्शन 1.0.0, 2024-02-20। QuranEnc.com

Al-Maaida

अरबी Tanzil का टेक्स्ट है, बिना किसी बदलाव के। मतलब अपने पब्लिशरों के एडिशन हैं, बिना किसी बदलाव के; सबील के अपने जाँच करने वालों ने अभी तक इन्हें नहीं जाँचा है। अरबी: Tanzil उस्मानी टेक्स्ट, वर्शन 1.1। स्रोत: tanzil.net