Al-Hujuraat 49:14
الحجراتقَالَتِ ٱلْأَعْرَابُ ءَامَنَّا ۖ قُل لَّمْ تُؤْمِنُوا۟ وَلَـٰكِن قُولُوٓا۟ أَسْلَمْنَا وَلَمَّا يَدْخُلِ ٱلْإِيمَـٰنُ فِى قُلُوبِكُمْ ۖ وَإِن تُطِيعُوا۟ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ لَا يَلِتْكُم مِّنْ أَعْمَـٰلِكُمْ شَيْـًٔا ۚ إِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
(कुछ) बद्दुओं ने कहा : हम ईमान ले आए। आप कह दें : तुम ईमान नहीं लाए। परंतु यह कहो कि हम इस्लाम लाए (आज्ञाकारी हो गए)। और अभी तक ईमान तुम्हारे दिलों में प्रवेश नहीं किया। और यदि तुम अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करोगे, तो वह तुम्हें तुम्हारे कर्मों में से कुछ भी कमी नहीं करेगा। निःसंदेह अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।[9]
[9] आयत का भावार्थ यह है कि मुख से इस्लाम को स्वीकार कर लेने से आदमी मुसलमान तो हो जाता है, किंतु जब तक ईमान दिल में न उतरे वह अल्लाह के समीप ईमान वाला नहीं होता। और ईमान ही आज्ञापालन की प्रेरणा देता है जिसका प्रतिफल मिलेगा।
मतलब: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari. Translated by Azizul Haq Al-Omari वर्शन 1.1.5, 2025-08-05। QuranEnc.com
कुछ बद्दुओं ने, अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास आकर कहा : हम अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान ले आए। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : तुम ईमान नहीं लाए। लेकिन तुम यह कहो : हम समर्पित हो गए और आज्ञाकारी बन गए। और अभी तक ईमान तुम्हारे दिलों में प्रवेश नहीं किया। अलबत्ता उसके प्रवेश करने की उम्मीद है। और अगर (ऐ देहातियो!) तुम ईमान, अच्छे कर्मों तथा हराम कामों से बचने में अल्लाह और उसके रसूल का आज्ञापालन करोगे, तो अल्लाह तुम्हें तुम्हारे कर्मों के प्रतिफल में से कुछ भी कमी नहीं करेगा। निःसंदेह अल्लाह अपने तौबा करने वाले बंदों को बहुत माफ़ करने वाला, उनपर अत्यंत दया करने वाला है।
यह संस्करण हर आयत की तशरीह करता है; यह उसका तर्जुमा नहीं है। मतलब: Hindi Translation of Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Quran. Issued by Tafsir Center for Quranic Studies वर्शन 1.0.0, 2024-02-20। QuranEnc.com
अरबी Tanzil का टेक्स्ट है, बिना किसी बदलाव के। मतलब अपने पब्लिशरों के एडिशन हैं, बिना किसी बदलाव के; सबील के अपने जाँच करने वालों ने अभी तक इन्हें नहीं जाँचा है। अरबी: Tanzil उस्मानी टेक्स्ट, वर्शन 1.1। स्रोत: tanzil.net