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सूरह 42 · आयत 48

Ash-Shura 42:48

الشورى

فَإِنْ أَعْرَضُوا۟ فَمَآ أَرْسَلْنَـٰكَ عَلَيْهِمْ حَفِيظًا ۖ إِنْ عَلَيْكَ إِلَّا ٱلْبَلَـٰغُ ۗ وَإِنَّآ إِذَآ أَذَقْنَا ٱلْإِنسَـٰنَ مِنَّا رَحْمَةً فَرِحَ بِهَا ۖ وَإِن تُصِبْهُمْ سَيِّئَةٌۢ بِمَا قَدَّمَتْ أَيْدِيهِمْ فَإِنَّ ٱلْإِنسَـٰنَ كَفُورٌ

मतलब

फिर यदि वे मुँह फेर लें, तो हमने आपको उनपर कोई संरक्षक बनाकर नहीं भेजा। आपका दायित्व तो केवल (संदेश) पहुँचा देना है। और निःसंदेह जब हम मनुष्य को अपनी ओर से कोई दया चखाते हैं, तो वह उससे खुश हो जाता है, और यदि उनपर उसके कारण कोई विपत्ति आ पड़ती है, जो उनके हाथों ने आगे भेजा है, तो निःसंदेह मनुष्य बड़ा नाशुक्रा है।

मतलब: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari. Translated by Azizul Haq Al-Omari वर्शन 1.1.5, 2025-08-05। QuranEnc.com

तफ़सीर

फिर यदि वे आपके दिए हुए आदेशों से मुँह फेर लें, तो हमने (ऐ रसूल!) आपको उनके ऊपर संरक्षक बनाकर नहीं भेजा है कि आप उनके कार्यों को संरक्षित करें। आपका कर्तव्य तो केवल उस चीज़ को पहुँचा देना है, जिसे पहुँचाने का आपको आदेश दिया गया है और उनका हिसाब अल्लाह के हवाले है। जब हम इनसान को अपनी ओर से समृद्धि और स्वास्थ्य आदि के रूप में दया का स्वाद चखाते हैं, तो वह खुशी से झूम उठता है। लेकिन अगर लोगों को उनके गुनाहों के कारण किसी विपत्ति का सामना होता है, तो उनका स्वभाव अल्लाह की नेमतों की कृतघ्नता तथा उनके प्रति आभार न व्यक्त करना और अल्लाह ने अपनी हिकमत के तहत जो कुछ नियत किया है उसपर असंतोष प्रकट करना होता है।

यह संस्करण हर आयत की तशरीह करता है; यह उसका तर्जुमा नहीं है। मतलब: Hindi Translation of Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Quran. Issued by Tafsir Center for Quranic Studies वर्शन 1.0.0, 2024-02-20। QuranEnc.com

Ash-Shura

अरबी Tanzil का टेक्स्ट है, बिना किसी बदलाव के। मतलब अपने पब्लिशरों के एडिशन हैं, बिना किसी बदलाव के; सबील के अपने जाँच करने वालों ने अभी तक इन्हें नहीं जाँचा है। अरबी: Tanzil उस्मानी टेक्स्ट, वर्शन 1.1। स्रोत: tanzil.net