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सूरह 42 · आयत 27

Ash-Shura 42:27

الشورى

وَلَوْ بَسَطَ ٱللَّهُ ٱلرِّزْقَ لِعِبَادِهِۦ لَبَغَوْا۟ فِى ٱلْأَرْضِ وَلَـٰكِن يُنَزِّلُ بِقَدَرٍ مَّا يَشَآءُ ۚ إِنَّهُۥ بِعِبَادِهِۦ خَبِيرٌۢ بَصِيرٌ

मतलब

और यदि अल्लाह अपने (सब) बंदों के लिए रोज़ी कुशादा कर देता, तो वे धरती में सरकशी[24] करते। परंतु वह एक अनुमान से उतारता है, जितना चाहता है। निश्चय वह अपने बंदों से भली-भाँति अवगत, भली-भाँति देखने वाला है।

[24] अर्थात यदि अल्लाह सभी को संपन्न बना देता, तो धरती में अवज्ञा और अत्याचार होने लगता और कोई किसी के आधीन न रहता।

मतलब: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari. Translated by Azizul Haq Al-Omari वर्शन 1.1.5, 2025-08-05। QuranEnc.com

तफ़सीर

यदि अल्लाह अपने सभी बंदों की आजीविका में विस्तार कर देता, तो वे धरती में अत्याचार और सरकशी करने लगते। लेकिन अल्लाह जिस मात्रा में चाहता है, विस्तृत या संकीर्ण रोज़ी उतारता है। निःसंदेह वह अपने बंदों की परिस्थितियों की खबर रखने वाला और उन्हें अच्छी तरह देखने वाला है। अतः वह हिकमत के अनुसार देता और हिकमत ही के अनुसार रोकता भी है।

यह संस्करण हर आयत की तशरीह करता है; यह उसका तर्जुमा नहीं है। मतलब: Hindi Translation of Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Quran. Issued by Tafsir Center for Quranic Studies वर्शन 1.0.0, 2024-02-20। QuranEnc.com

Ash-Shura

अरबी Tanzil का टेक्स्ट है, बिना किसी बदलाव के। मतलब अपने पब्लिशरों के एडिशन हैं, बिना किसी बदलाव के; सबील के अपने जाँच करने वालों ने अभी तक इन्हें नहीं जाँचा है। अरबी: Tanzil उस्मानी टेक्स्ट, वर्शन 1.1। स्रोत: tanzil.net