Ash-Shura 42:14
الشورىوَمَا تَفَرَّقُوٓا۟ إِلَّا مِنۢ بَعْدِ مَا جَآءَهُمُ ٱلْعِلْمُ بَغْيًۢا بَيْنَهُمْ ۚ وَلَوْلَا كَلِمَةٌ سَبَقَتْ مِن رَّبِّكَ إِلَىٰٓ أَجَلٍ مُّسَمًّى لَّقُضِىَ بَيْنَهُمْ ۚ وَإِنَّ ٱلَّذِينَ أُورِثُوا۟ ٱلْكِتَـٰبَ مِنۢ بَعْدِهِمْ لَفِى شَكٍّ مِّنْهُ مُرِيبٍ
और वे[12] लोग आपस की ज़िद के कारण इसके पश्चात् अलग-अलग हुए कि उनके पास ज्ञान आ चुका था। तथा यदि वह बात न होती जो आपके पालनहार की ओर से एक निश्चित समय के लिए पहले तय[13] हो चुकी, तो अवश्य उनके बीच निर्णय कर दिया जाता। और निःसंदेह वे लोग जो उनके पश्चात् पुस्तक के उत्तराधिकारी बनाए[14] गए, वे इस (क़ुरआन) के बारे में दुविधा में डालने वाले संदेह में पड़े हैं।
[12] अर्थात मुश्रिक।
[13] अर्थात प्रलय के दिन निर्णय करने की।
[14] अर्थात यहूदी तथा ईसाई भी सत्य में मतभेद तथा संदेह कर रहे हैं।
मतलब: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari. Translated by Azizul Haq Al-Omari वर्शन 1.1.5, 2025-08-05। QuranEnc.com
काफ़िरों और मुश्रिकों ने मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के ईशदूतत्व के द्वारा अपने ऊपर तर्क स्थापित होने के पश्चात ही विभेद किया। और उनका यह विभेद भी केवल सरकशी और अत्याचार के कारण था। अगर अल्लाह के ज्ञान में यह बात पहले से न होती कि वह अपने ज्ञान में निर्दिष्ट एक अवधि यानी क़ियामत के दिन तक उनसे यातना को विलंबित रखेगा, तो अल्लाह अवश्य उनके बीच निर्णय कर देता और उनके अल्लाह का इनकार करने तथा उसके रसूलों को झुठलाने के कारण, उन्हें इसी दुनिया में यातना देता। इन बहुदेववादियों के बाद तथा अपने पूर्वजों के बाद जो यहूदी तौरात के और जो ईसाई इंजील के वारिस हुए, वे इस क़ुरआन के बारे में, जो मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम लेकर आए हैं, संदेह में पड़े हुए हैं और उसे झुठला रहे हैं।
यह संस्करण हर आयत की तशरीह करता है; यह उसका तर्जुमा नहीं है। मतलब: Hindi Translation of Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Quran. Issued by Tafsir Center for Quranic Studies वर्शन 1.0.0, 2024-02-20। QuranEnc.com
अरबी Tanzil का टेक्स्ट है, बिना किसी बदलाव के। मतलब अपने पब्लिशरों के एडिशन हैं, बिना किसी बदलाव के; सबील के अपने जाँच करने वालों ने अभी तक इन्हें नहीं जाँचा है। अरबी: Tanzil उस्मानी टेक्स्ट, वर्शन 1.1। स्रोत: tanzil.net