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सूरह 4 · आयत 116

An-Nisaa 4:116

النساء

إِنَّ ٱللَّهَ لَا يَغْفِرُ أَن يُشْرَكَ بِهِۦ وَيَغْفِرُ مَا دُونَ ذَٰلِكَ لِمَن يَشَآءُ ۚ وَمَن يُشْرِكْ بِٱللَّهِ فَقَدْ ضَلَّ ضَلَـٰلًۢا بَعِيدًا

मतलब

निःसंदेह अल्लाह अपने साथ साझी ठहराए जाने को क्षमा[79] नहीं करेगा और इससे कमतर पाप जिसके लिए चाहेगा, क्षमा कर देगा। तथा जो अल्लाह का साझी बनाता है, वह यक़ीनन भटककर बहुत दूर जा पड़ा।

[79] अर्थात शिर्क (मिश्रणवाद) अक्षम्य पाप है।

मतलब: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari. Translated by Azizul Haq Al-Omari वर्शन 1.1.5, 2025-08-05। QuranEnc.com

तफ़सीर

निःसंदेह अल्लाह इस बात को क्षमा नहीं करेगा कि किसी को उसका साझी बनाया जाए, बल्कि साझी बनाने वाले को हमेशा के लिए जहन्नम में डाल देगा। लेकिन शिर्क से कमतर गुनाहों को जिसके लिए चाहेगा अपनी दया एवं कृपा से माफ़ कर देगा। जो किसी को अल्लाह का साझी बनाता है, वह निश्चय ही सत्य मार्ग से भटक गया और उससे बहुत दूर हो गया; क्योंकि उसने सृष्टि और सृष्टिकर्ता को बराबर बना दिया।

यह संस्करण हर आयत की तशरीह करता है; यह उसका तर्जुमा नहीं है। मतलब: Hindi Translation of Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Quran. Issued by Tafsir Center for Quranic Studies वर्शन 1.0.0, 2024-02-20। QuranEnc.com

An-Nisaa

अरबी Tanzil का टेक्स्ट है, बिना किसी बदलाव के। मतलब अपने पब्लिशरों के एडिशन हैं, बिना किसी बदलाव के; सबील के अपने जाँच करने वालों ने अभी तक इन्हें नहीं जाँचा है। अरबी: Tanzil उस्मानी टेक्स्ट, वर्शन 1.1। स्रोत: tanzil.net