Al-Ahzaab 33:6
الأحزابٱلنَّبِىُّ أَوْلَىٰ بِٱلْمُؤْمِنِينَ مِنْ أَنفُسِهِمْ ۖ وَأَزْوَٰجُهُۥٓ أُمَّهَـٰتُهُمْ ۗ وَأُو۟لُوا۟ ٱلْأَرْحَامِ بَعْضُهُمْ أَوْلَىٰ بِبَعْضٍ فِى كِتَـٰبِ ٱللَّهِ مِنَ ٱلْمُؤْمِنِينَ وَٱلْمُهَـٰجِرِينَ إِلَّآ أَن تَفْعَلُوٓا۟ إِلَىٰٓ أَوْلِيَآئِكُم مَّعْرُوفًا ۚ كَانَ ذَٰلِكَ فِى ٱلْكِتَـٰبِ مَسْطُورًا
यह नबी[3] ईमान वालों पर उनके अपने प्राणों से अधिक हक़ रखने वाले हैं। और नबी की पत्नियाँ उनकी माताएँ[4] हैं। और रिश्तेदार, अल्लाह की किताब के अनुसार, (अन्य) ईमान वालों और मुहाजिरों से एक-दूसरे के अधिक हक़दार[5] हैं। सिवाय इसके कि तुम अपने मित्रों के साथ कोई भलाई करो। यह पुस्तक में लिखा हुआ है।
[3] ह़दीस में है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने कहा : मैं मोमिनों का अधिक हक़दार हूँ। चाहो तो यह आयत पढ़ लो। अतः जो मोमिन माल छोड़ जाए, वह उसके वारिस का है और जो क़र्ज़ तथा निर्बल संतान छोड़ जाए, तो मैं उसका रक्षक हूँ। (सह़ीह़ बुख़ारी : 4781)
[4] अर्थात उनका सम्मान माताओं के बराबर है और आपके पश्चात् उनसे विवाह निषिद्ध है।
[5] अर्थात धर्म विधानानुसार उत्तराधिकार समीपवर्ती संबंधियों का है। इस्लाम के आरंभिक युग में हिजरत तथा ईमान के आधार पर एक-दूसरे के उत्तराधिकारी होते थे जिसे मीरास की आयत द्वारा निरस्त कर दिया गया।
मतलब: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari. Translated by Azizul Haq Al-Omari वर्शन 1.1.5, 2025-08-05। QuranEnc.com
पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम, हर उस चीज़ के मामले में जिसकी ओर वह ईमान वालों को बुलाएँ, उन पर स्वयं उनके अपने प्राणों से भी अधिक हक़ रखने वाले हैं, भले ही उनके दिल दूसरों के प्रति झुकाव रखते हों। और आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की पत्नियाँ सभी ईमान वालों की माताओं के दर्जे में हैं। इसलिए किसी भी मोमिन के लिए आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की मृत्यु के बाद उनमें से किसी से शादी करना हराम (निषिद्ध) है। और रिश्तेदार, अल्लाह के आदेश के अनुसार, विरासत के मामले में अन्य ईमान वालों और मुहाजिरों से आपस में एक-दूसरे पर अधिक हक़ रखने वाले हैं, जो इस्लाम की शुरुआत में आपस में एक-दूसरे का वारिस हुआ करते थे, फिर इस तरह से आपस में वारिस होने के नियम को निरस्त कर दिया गया। परंतु (ऐ ईमान वालो!) अगर तुम वारिसों के अलावा अपने अन्य दोस्तों के लिए कुछ धन की वसीयत करना तथा उनपर उपकार करना चाहो, तो तुम ऐसा कर सकते हो। यह आदेश लौह़े मह़फूज़ में अंकित है। इसलिए इसपर अमल करना ज़रूरी है।
यह संस्करण हर आयत की तशरीह करता है; यह उसका तर्जुमा नहीं है। मतलब: Hindi Translation of Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Quran. Issued by Tafsir Center for Quranic Studies वर्शन 1.0.0, 2024-02-20। QuranEnc.com
अरबी Tanzil का टेक्स्ट है, बिना किसी बदलाव के। मतलब अपने पब्लिशरों के एडिशन हैं, बिना किसी बदलाव के; सबील के अपने जाँच करने वालों ने अभी तक इन्हें नहीं जाँचा है। अरबी: Tanzil उस्मानी टेक्स्ट, वर्शन 1.1। स्रोत: tanzil.net